ISSN : 2349-7521, IMPACT FACTOR - 9.0, DOI 10.5281/zenodo.14599030 (Peer Reviewed, Refereed, Indexed, Multidisciplinary, Bilingual, High Impact Factor, ISSN, RNI, MSME), Email - aksharwartajournal@gmail.com, Whatsapp/calling: +91 8989547427, Editor - Dr. Mohan Bairagi, Chief Editor - Dr. Shailendrakumar Sharma
Saturday, July 18, 2020
बहुरूपी प्रकृति
व्यंग्य - हमें भी सम्मानित करो
व्यंग्य - हरी चाय पर चर्चा
बाल कविता - कालू बन्दर
बाल कविता - कालू बन्दर
कालू बंदर है बहुत परेशान,
भारी गर्मी से वो होता हैरान।
बादल कभी - कभी है दिखते,
ना जाने फिर क्यों नही टिकते।
प्रभु से फिर करने लगा गुहार,
प्रभु कर दो बारिश की बौछार।
उमड़ - घुमड़ कर बादल आये,
कालू झूम-झूम कर नाचे गाये।
तन - मन कालू के हो गए तृप्त,
बारिश जंगल मे हुई जबरदस्त।
दूर हो गयी जंगल से गर्मी की मार,
कई दिन बरसे बादल बारम्बार।
नीरज त्यागी
ग़ाज़ियाबाद ( उत्तर प्रदेश ).
"सावन की घटा"
"सावन की घटा"
सावन की छाई है घटा घनघोर,जाने कहाँ पर बरसे!
अ बदरी! तू बरसे वहां, जहाँ पिया मिलन को तरसे!!
तन मन उसका झुलस रहा है,तप्त हवा के झोकों से!
शीतल समीर तलाश रहा,वो आसपास के झरोखों से!!
प्रेमी मन तो होता बावरा, चित कहीं भी ना लग पाए!
हरी भरी हरियाली भी, उनके मन को ना कत्तई सुहाए!!
सावन की रिमझिम फुहारें, छूने लगी मेरे अंतर्मन को!
जाके बरस उस आंगन में, भिगो देना तू उसके तन को!!
दिल मे तो मची उथल पुथल, जुबां फिर भी है खामोश!
भीड़ इर्द-गिर्द खड़ी है, पर खाली है उसका आगोश!!
भिगो उसके तन मन को, लौट आना तू मेरे आंगन में!
अधरों की प्यास मिटा देना, उसकी बरसते सावन में!!
चन्द लम्हे ये जुदाई के, लगे जैसे हो गए हों कई अरसे!
चौक गलियारे लगे सूने, निकल गए जब हम घर से!
सावन की छाई है घटा घनघोर,जाने कहाँ पर बरसे!
अ बदरी! तू बरसे वहाँ, जहां पिया मिलन को तरसे!!
सुषमा मलिक "अदब"
रोहतक (हरियाणा)
Tuesday, July 14, 2020
युद्धों को नकारते गीत
दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी द्वारा संकल्प पर्व के उपलक्ष्य में "मानव जीवन में प्रकृति का महत्त्व" विषय पर काव्य पाठ (वेबिनार) का आयोजन
दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी द्वारा संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार का अनुसरण करते हुए, प्रकृति के प्रति अपनी सद्भावना प्रकट करने हेतु दिनांक 28 जून 2020 से 12 जुलाई 2020 तक संकल्प पर्व मनाया जा रहा है । इसी उपलक्ष्य में दिनांक 12 जुलाई 2020 को संकल्प पर्व के अंतिम दिवस पर दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी द्वारा "मानव जीवन में प्रकृति का महत्त्व" विषय पर काव्य पाठ (वेबिनार) का आयोजन किया गया । कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. रामशरण गौड़, अध्यक्ष, दिल्ली लाइब्रेरी बोर्ड द्वारा की गयी तथा सुश्री रजनी अवनी, कवयित्री व श्रीमती अंजना अंजुम, कवयित्री एवं समाज सेविका वक्ता के रूप में उपस्थित रहीं । इस कार्यक्रम का प्रसारण सुदर्शन टी.वी द्वारा करवाने का संयोजन श्री प्रवीण आर्य द्वारा किया जायेगा ।
सुश्री रजनी अवनी ने अपने काव्य के माध्यम से वृक्षों की मानव जीवन में भूमिका व आवश्यकता बतायी। साथ ही, उन्होंने अपने गीतों के द्वारा श्रोताओं से प्रकृति की रक्षा करने, उससे प्रेम करने तथा उसके प्रति संवेदनशीलता रखने का आह्वाहन किया।
श्रीमती अंजना अंजुम ने काव्य पाठ द्वारा सभी श्रोताओं से लकड़ी का खनन रोकने, वृक्ष लगाने, तथा रोज़ एक वृक्ष को पानी देने का संकल्प कर धरा को संवारने में अपना योगदान देने का निवेदन किया ।
श्री प्रवीण आर्य द्वारा अपने वक्तव्य में कहा कि प्रकृति से छेड़-छाड़ के भयावह परिणाम हो सकते हैं उनमें से एक का हम कोरोना महामारी के रूप में सामना कर ही रहे हैं इसलिए यह अत्यंत आवश्यक हो गया है की हम प्रकृति के प्रति स्नेहपूर्ण भाव रखें, उसकी रक्षा करें।
डॉ. रामशरण गौड़ ने श्रोताओं को बताया कि मानव शरीर पञ्च तत्वों- मिट्टी, पानी, अग्नि, वायु और शून्य से निर्मित है जोकि उसे पोषित करते हैं। इन पांच तत्वों का संतुलन ही हमारे तन व मन को स्वस्थ रखता है। यह पांच तत्व प्रकृति के महत्त्वपूर्ण अंग हैं अतः मनुष्य हेतु इनका संरक्षण करना, न्यायिक उपयोग करना तथा इनके प्रति संवेदनशीलता रखना अतिआवश्यक है। उन्होंने सभी श्रोताओं से आग्रह किया कि वह संकल्प पर्व को अपने जीवन का अंग बनाये और निरंतर समयानुसार तथा स्थानुसार एक वृक्ष लगाने का प्रयास करें और वृक्षारोपण को अपने जीवन का अंग बनाये I
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