कविता..
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Sunday, April 18, 2021
कविता.. किसान पिता..
हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति को बचाने में सहायता कीजिए (ओमान से एक हिंदी शिक्षक की गुहार)
हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति को बचाने में सहायता कीजिए(ओमान से एक हिंदी शिक्षक की गुहार)
कवरिंग लेटर :-- जैसे मैं पहले लिख चुका हूँ सीबीएसई से सम्बद्ध इंडियन स्कूल निजवा ओमान से हिन्दी भाषी हिन्दी शिक्षक - शिक्षिकाओं को षड्यंत्र करके हंटाकर हिन्दी भाषा को कमजोर किया जा रहा है। ये बातें लिखने पर स्कूल वाले जेल में बंद करवा देने की धमकियाँ दे रहे हैं। हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति को बंचाने में सहायता कीजिए।
1 अप्रैल को अम्बेसडर साहब ने मुझे मिलने का समय दिया था। निज़वा से मिलने के लिए हम दोनों गये थे पर अचानक सर की कोई मीटिंग आ गई तो पूरी बात नहीं हो पाई। उन्हें बताना चाहता हूँ :-- निज़वा की समस्या के लिए जिम्मेदार प्रिंसिपल जॉन डोमनिक प्रिंसिपल के लायक योग्यता - अनुभव नहीं रखते हैं। प्रेसिडेंट नौशाद काकेरी कम पढ़े - लिखे छोटे बिजनेस मैन हैं, जिनके बच्चे लगभग 2 साल पहले ISN से टीसी ले चुके हैं। ऐसे अरुण प्रसाद और मुफीद साहब भी प्रिंसिपल की संकुचित धारणा के समर्थन के लिए कमेटी में हैं -- इन्हीं सबसे तंग आकर अत्यंत अनुभवी और योग्य पुराने प्रेसीडेंट डॉक्टर जुनैद - अनुपमा मैम और फरकत उल्लाह सर कमेटी से रिजाइन कर दिया है। (उन्होंने कई बार प्रिंसिपल की समस्याओं को BOD में भेजा था, पर कोई सुनवाई नहीं हुई।) - डॉक्टर जुनैद की कमेटी के सभी लोग, जब वो लोग कमेटी चला रहे थे, टीचर्स के निवेदन पर HOD - Incharges को बदलने की बात की थी, पर प्रिंसिपल ने किसी की बात नहीं मानी और पब्लिकली सभी स्टाफ के सामने मना कर दिया। आज उन्हीं अयोग्यों की टीम बनाकर प्रिंसिपल सर राजनीति कर रहे हैं --
प्रिंसिपल के आने से पहले ISN में रियाल्स की कमी नहीं रहती थी - बोर्ड में बच्चे फेल नहीं होते थे सब मिलकर काम करते थे। मेरे मेंटर फहीम सर हैं पर आज प्रिंसिपल मेरे बारे में against the community का झूठा प्रचार करते हैं क्योंकि सबसे जूनियर अपेक्षाकृत अनुभवहीन रूना फातिमा को हिन्दी एचओडी कैसे बनाए हैं - मैंने ये प्रश्न कर दिया था - ये निवेदन दिसंबर 2019 में ऐम्बेसडर साहब से मिलने पर और पुराने प्रिंसिपल - प्रेसीडेंट को भी भेजा था तब तो ये प्रश्न इस श्रेणी में नहीं आया था ? -- जिससे सभी दुखी हुए पर प्रिंसिपल के साथ पूरा बीओडी ऑफिस है ये सोचकर सभी चुप रह गए। बोर्ड रिजल्ट्स जो कि इस बार का सबसे खराब आया है, स्कूल में लगाया जाए ऐसे निर्देश को जो कि उस समय के अकेडेमिक कोऑर्डिनेटर अनुपमा मैम ने सुझाव दिया था, उनकी बात भी प्रिंसिपल ने नहीं मानी थी। इसलिए अनुपमा मैम ने दुखी होकर रिजाइन कर दिया।
2015 में मेरे ज्वाइन करने के बाद 7 हिन्दी शिक्षक - शिक्षिकाएँ थीं। डॉक्टर अशोक कुमार तिवारी, हिन्दी विभागाध्यक्ष, सुनंदा तिवारी , शोभा मैम , हिना आलम, प्रियदर्शिनी मैम, प्रमोद तिवारी, रूना फातिमा ( रूना फातिमा के अतिरिक्त सभी गैर मलयाली थे। आज केवल रूना फातिमा एकमात्र हिन्दी शिक्षिका ISN में बची हुई हैं। बाकी सभी को षड्यंत्र करके हटा दिया गया है ।) स्कूल के 53 टीचर्स तथा हिन्दी पढ़ने वाले बच्चों के पैरेंट्स के लिखित निवेदन पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। 25 फरवरी की इन्क्वायरी रिपोर्ट भी अभी तक नहीं आई है।
डॉ. अशोक कुमार तिवारी
हास्य व्यंग्य सत्य कथा
- मदन गुप्ता सपाटू
- लव कुमार चालीसिया चुके थे। यानी 40 वसंत देख चुके थे और अब पतझड़ का स्टार्ट अप था। रिश्ते ढूंढने में किसी रिश्तेदार, पड़ोसी ने कोई कसर नहीं छोड़ी। माता पिता वैवाहिक विज्ञापनों , शादी वेबसाइटों की छाक छानते छानते और बूढे हो चले थे। रिश्तेदार उनका हाल चाल पूछते हुए एक ताना जरुर टिका डालते- लव का लव परवान कहीं चढा़ कि नहीं ? हालांकि लवकुमार इधर उधर मुंह मारते रहे लेकिन किसी सुकन्या तो क्या किसी परित्यकता या विधवा तक ने घास नहीं डाली।
ज्योतिषियों बाबाओं के खूब चक्कर काटेे। दान दक्षिणा में लुटे। देख दिखाई भी खूब हुई। कभी कोई उनको पसंद न आता कभी वो ऐसे रिजैक्ट हो जाते जैसे बिना सिफारिश के इंटरव्यू देने गया केैंडीडेेट! लॉकडाउन के दौरान लवकुमार एक कंपनी से टपक गए लेकिन कुछ दिनों बाद बेंगलुरु की एक कंपनी के द्वारा लपक लिए। बस यहीं उनकी किस्मत का जंग खाया लॉक, लॉक डाउन में खटाक से खुल गया जब उसी दफतर में ऐसी ही हालातों से गुजरी हुई एक मोतरमा लवलीन टकर गई। बस रात की शिफ्ट में ऐनक के मोटे शीशों के पीछे से नजरें आठ हुईं और दिल गार्डन गार्डन हो गया। लव की शताब्दी में दोनों ऐसे सवार हुए कि एक दिन घर वालों को खबर कर डाली कि शादी की तैयारियां करो, हम आ रहे हैं। पिता जी ने एक बार सजेस्ट किया ठहरो! मैं जरा एक बार कुंडली मिलवा लेता हूं । उधर से बरखुरदार ने जोर से डांटा - आपके कुंडली मिलवाने के चक्कर में तो मेरी ये हालत हो चुकी है। और बूढ़ा करवाने का इरादा है क्या? इतना सुनते ही मुसदद्ी लाल , पंडित जी को बायपास करते हुए डायरेक्ट , माता मंसा देवी के दरबार में फुल स्पीड से पहुंचे। पांच सौ एक चढ़ाए। चौकी का वादा कर आए।
इधर सरकारी फरमान के अनुसार, सिर्फ 100 लोगों को गोल गप्पे , चाट, 135 तरह के पकवानों और दारु की छबील लगा कर बरसों से अटका हुआ अभियान पूरा हुआ।
अगले दिन लव कुमार और लवलीन, अपने बंगलौरी लव को भुनाने के लिए हनीमून जाने की योजना बनाने लगे। बापू अड़ गए कि पहले वैष्णों देवी जा आओ। तेरी मां ने सुखना सुखी थी! लव कुमार भड़का- हनीमून पे जाना है। कीर्तन करने नहीं। बापू ने समझाया - बेटा अपने हिन्दुस्तान में इतनी जगहें हैं वहां चले जाओ । नजदीक शिमला है। मोैसम भी आशिकाना है वहां। टॅवाय ट्रे्न भी सरकार ने शुरु कर दी है। एयर सर्विस भी चालू हो गई है। तीन की जगह 13 दिन लगा आओ। ज्यादा से ज्यादा गोवा जा आओ। लव कुमार बापू पर फिर भड़का- डैड ! आप अपने टाइम की बातें कर रहे हो । आपके टाइम तो हनीमून का कांसैप्ट होता ही नहीं था। जमाना बदल चुका है । हर कपल फारेन में जाता है मैरिज के बाद। और हमारी मैरिज भी ऐसे वक्त हुई है जब टोटल गैस्ट मेरे समेत 100 ही थे। एक सौ एकवें जो फूफा जी निकले थे उनको तो पुलिस ही उठा के ले गई थी ।आपका कितना खर्चा बचा! और आपने अब कोई अडं़गा लगाया तो सारी उम्मीदों पर ट्र्ैक्टर फेर दूंगा।
लवकुमार ने मोबाइल पर ही मेक मॉय ट्रिप पर मालदीव के लिए तीन रातें -चार दिन का पैकेज करवाया, एक डॉक्टर से नेगेटिव रिपोर्ट का सर्टीफिकेट बनवाया और लैंड कर गए सपनों से भी ज्यादा खूबसूरत हनीमून डेस्टीनेशन पर।
लैंड करते ही वहां की सरकार ने उनका चैक अप करवाया। उन्हें पॉजीटिव करार दे दिया और मियां बीबी को एक ही होटल में अलग अलग कमरों में क्वारंटीन कर डाला। लाइफ हो गई झींगा लाला। जहाज में दोनो बॉबी बनकर गा रहे थे- हम तुम एक कमरे में बंद हो , और चाबी खो जाए। अब उल्टा गाना पड़ रहा था- तू कहां ...मैं कहां ..इस अन्धे जहां में ?
ट्रैवल कंपनी का तीन रात- चार दिन का पैकेज ओवर। खेल खतम -पैसा हजम। होटल का मीटर चालू । होटल ने रिहाई के समय 10 लाख का बिल पेश कर दिया। लव कुमार जी जिसे वहां की सरकार की भारत सरकार की तरह खातिरदारी समझ रहे थे , गलत फहमी दूर हो गई। बिल देख कर दिल बैठ गया। बिल का मामला दिल का मामला बन गया। लवकुमार और लवलीन बेगम का लव जिहाद छू मंतर हो गया। बापू को फोन लगाया। इधर उधर से जुगाड़ करके बेचारे बापू ने मालदीव का बिल चुकाया। होटल से रिहा करवाया।
वहां की सरकार ने दोनों को विदा करने से पहले एक टैस्ट करवाया तो लवलीन जी पॉजिटिव हो गई। सरकार ने बोला- बेटा जी अब फिर चलो 14 दिन अंदर। लेकिन बिल्कुल अलग अलग। इस बार एक होगा एक जगह, दूसरा होगा क्वारंटीन सेंटर में । इस नेगेटिव- पॉजिटिव के चक्कर में बापू जी का शार्ट सर्कट हो गया और उनका फ्यूज उड़ते उड़ते बचा।
फिर एक बार रिहाई के लिए हैवी खर्चापानी भेजा। अभी एक शॉक बाकी था। टिकटें कैंसल हो चुकी थी। उसका भी आधा रिफंड ही मिला और दूसरी तरफ नई टिकटों के रेट 30 हजार फुट की उंचाई से भी ऊपर चढ़ गए। मरते क्या न करते, वो भी स्पेशल परमिशन भारत सरकार से सिफारिश करवा के ली गई। रिश्तेदारों, बैंकों, प्राईवेट फायनांसरों के तरले करके जहाज के किराये का जुगाड़ किया गया। पंजाबी में बोले तो - मुसदद्ी लाल के तप्पड़ रुल गए। हाथों के तोते उड़ गए।
हनीमून के मतवाले जब दिल्ली उतरे तो भारत सरकार ने उन्हें फिर 14 दिन की सजा बामुशक्कत यानी अलग अलग कमरों में रहने की सुना दी। लौट के हनीमूनर घर को आए। कोई रिश्ते दार तो क्या कोई पडो़सी उनका हालचाल पूछने एक महीने तक नजदीक नहीं फटका क्यों कि लोकल हैल्थ विभाग ने उनके घर के आगे एक बाड़ लगा दी और बाहर एक पोेस्टर चिपका दिया -हैप्पी हनीमून यानी इस घर के आस पास फटकना मना है। फटके तो तुम भी धरे जाओगे।
लव कुमार और लवलीन ने तौबा कर ली..... हमारी क्या .... हमारे बाप की तौबा जो अब कभी हनीमून का नाम सपने में भी लिया....
- मदन गुप्ता सपाटू
आंसू कुछ कहती है...!!![बेटी की महत्ता पर एक कविता]
आंसू कुछ कहती है...!!![बेटी की महत्ता पर एक कविता]
बेटी क्यों नैनों से,नीर बहाती तुम।
हम सब को दुःख,
क्यों पहुंचाती तुम।
नैनो से बहती नीर नहीं,
यह बहती हैं तकदीर मेरी।
बेटी क्यों नैनों से नीर बहाती तुम ?
हरसब को दुःख पहुचाती तुम।
तुम तो अम्मा की लाडो हो,
घर में सबकी प्यारी हो।
फिर दुःखी क्यों कर जाती तुम,
बेटी क्यों नैनों से नीर बहाती तुम ?
मां की कोख की लाज हो तुम,
मेरी हम सब की हमराज हो तुम।
फिर दुखी क्यों कर जाती तुम,
बेटी क्यों नैनों से नीर बहाती तुम ?
वसुंधरा की तु है एक अविरल धार,
सब डूबते दिखते बारम्बार।
घर की रखवाली करती तुम,
मां की बोझ उठाती तुम।
हम सब की है तु एक शान,
तुम पर है हम सब को गुमान।
फिर दुखी क्यों कर जाती तुम !
बेटी क्यों नैनों से नीर बहाती तुम ?
सम्बन्धों की तु अविरल धार है,
अम्मा की तू खेवनहार है,
मां हरपल कहती -सुनती है तुम्हें ,
तुमको सब बातें बतलाती रहती है तुम्हें,
लगती तुमको अच्छी- बुरी,
सुन जाती चाहे दिल को लगे बुरी ,
फिर दुखी क्यों कर जाती तुम,
बेटी क्यों नैनों से नीर बहाती तुम ?
तु जीत की है एक पहचान,
घर में दिखती लगती महान।
आशा की धार में तु ही तु,
खेवनहार भी तु ही तु,
हौसले की है तु एक मजबूत डोर,
तुझसे दिखती सब कमजोर।
फिर दुःखी क्यों कर जाती तुम,
बेटी क्यों नैनो से नीर बहाती तुम ?
कोमलता की है तु एक श्रंगार,
जीवन में दिखलाती है प्यार।
शीतलता की है एक श्रेष्ठ प्रतीक,
बनती दिखती एक मधुर संगीत।
फिर दुखी क्यों कर जाती तुम,
बेटी क्यों नैनो से नीर बहाती तुम ?
मां की पीड़ा की है एक आस,
घर में सबको है इसका एहसास।
मनप्रीत की है तु एक अनमोल प्यार,
जो हरपल देती एक मजबूत पुकार।
घर आंगन में पाकर तुमको,
घर लगती हरपल ख़ूब गुलजार।
फिर दुःखी क्यों कर जाती तुम,
बेटी क्यों नैनो से नीर बहाती तुम ?
घर- आंगन की मडवा की है,
तु है एक उन्नत पहचान।
बेटी बीन सब सुना- सुना है,
बेटी बीन नहीं है ,
मिटी घर की पहचान।
डोली बेटी की,
जिस घर से उठती नहीं।
घर आंगन उसकी,
महकती व धरकती नहीं।
मा -बाप की तु है,
एक सुंदर खोज।
हर पल उच्श्रृंखल बनी रहती ,
खुशियां लाती हरपल हररोज।
फिर दुःखी क्यों कर जाती तुम,
बेटी क्यों नैनो से नीर बहाती तुम ?
डॉ ०अशोक, पटना, बिहार।
Sunday, April 4, 2021
गुलाम और गुलामी
गुलाम और गुलामी
विविध आयामी , ऐतिहासिक 21वीं सदी का उद्घोषक भाव चित्र" अंतर्राष्ट्रीय काव्य संकलन "आरंभ उद्घोष 21वीं सदी का' विमोचन।
विविध आयामी , ऐतिहासिक 21वीं सदी का उद्घोषक भाव चित्र" अंतर्राष्ट्रीय काव्य संकलन "आरंभ उद्घोष 21वीं सदी का' विमोचन।
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