ISSN : 2349-7521, IMPACT FACTOR - 9.0, DOI 10.5281/zenodo.14599030 (Peer Reviewed, Refereed, Indexed, Multidisciplinary, Bilingual, High Impact Factor, ISSN, RNI, MSME), Email - aksharwartajournal@gmail.com, Whatsapp/calling: +91 8989547427, Editor - Dr. Mohan Bairagi, Chief Editor - Dr. Shailendrakumar Sharma
Monday, July 11, 2022
Tuesday, May 31, 2022
Tuesday, April 26, 2022
Monday, April 4, 2022
नोबल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने किया अक्षरवार्ता के नवीन अंक का लोकार्पण अक्षरवार्ता पत्रिका के अंक पर हस्ताक्षर कर शुभकामनाएं दी।
नोबल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने किया अक्षरवार्ता के नवीन अंक का लोकार्पण
अक्षरवार्ता पत्रिका के अंक पर हस्ताक्षर कर शुभकामनाएं दी।
उज्जैन। इतिहास रचने वाले व्यक्तियों से यदि हम रूबरू होते हैं तब यह हमारे जीवन का भी ऐतिहासिक क्षण होता है। श्री कैलाश सत्यार्थी एैसे ही व्यक्ति हैं, जिन्हें 2014 में बचपन बचाओं अभियान के विश्व प्रसिद्ध नोबल पुरस्कार दिया गया। अक्षरवार्ता अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका के संपादक मंडल के लिए यह गौरवान्वित करने वाले क्षण थे, जब वे श्री कैलाश सत्यार्थी के साथ थे, इस अवसर पर नोबल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने अक्षरवार्ता अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका के नवीन अंक का लोकार्पण किया। दिनांक 2 अप्रेल 2022 को विक्रम विश्वविद्यालय के छब्बीसवें दिक्षांत समारोह के अवसर पर श्री सत्यार्थी ने अक्षरवार्ता के नवीन अंक को लोकार्पित किया। इस अवसर पर लखनउ स्थित बाबा भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री बरतुनिया, महर्षि पाणिनि संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति श्री विजय कुमार मेनन, भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, महु के कुलपति श्री दिनेश शर्मा, विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अखिलेश पाण्डेय, विक्रम विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. प्रशांत पुराणिक तथा अक्षरवार्ता अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका के अंतरराष्ट्रीय संपादक मंडल के सदस्य ओस्लो, नार्वे से श्री सुरेशचंद्र शुक्ल, प्रधान संपादक डॉ. शैलेन्द्रकुमार शर्मा, संपादक डॉ. मोहन बैरागी, उप संपादक डॉ. जगदीश चंद्र शर्मा सहित अन्य संपादक मंडल सदस्य उपस्थित थे।
श्री कैलाश सत्यार्थी एवं उनकी पत्नि श्रीमति सुमेधा सत्यार्थी जी ने अक्षरवार्ता शोध पत्रिका के अंक पर हस्ताक्षर कर शुभकामनाएं प्रेषित की।
Monday, February 28, 2022
स्वयं आधारित शिक्षा से होगा इक्कीसवीं सदी में शिक्षा का विस्तार - कुलपति प्रो राव इक्कीसवीं सदी का भारत : उपलब्धि, चुनौतियां और समाधान विषय पर राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी सम्पन्न दस राज्यों के शिक्षाविदों और शोध अध्येताओं को अर्पित किए गए अवगत अवार्ड 2022
स्वयं आधारित शिक्षा से होगा इक्कीसवीं सदी में शिक्षा का विस्तार - कुलपति प्रो राव
इक्कीसवीं सदी का भारत : उपलब्धि, चुनौतियां और समाधान विषय पर राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी सम्पन्न
दस राज्यों के शिक्षाविदों और शोध अध्येताओं को अर्पित किए गए अवगत अवार्ड 2022
महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय, उज्जैन, अक्षरवार्ता अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका एवं संस्था कृष्ण बसंती द्वारा संयुक्त रूप से 27 फरवरी को अभिरंग नाट्यगृह में राष्ट्रीय संगोष्ठी सह व्याख्यान सम्पन्न हुए। यह संगोष्ठी इक्कीसवीं सदी का भारत : उपलब्धि, चुनौतियां और समाधान (संस्कृति, शिक्षा, साहित्य, चिंतन और समाज के परिप्रेक्ष्य में) विषय पर अभिकेंद्रित थी। कार्यक्रम में अक्षरवार्ता अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका एवं संस्था कृष्ण बसंती द्वारा अवगत अवार्ड 2022 प्रदान किए गए। संगोष्ठी के उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली के कुलपति प्रो. नागेश्वर राव, कार्यक्रम के अध्यक्ष महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलपति प्रो सी जे विजय कुमार मेनन एवं विशिष्ट अतिथि विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलानुशासक प्रो. शैलेंद्रकुमार शर्मा थे। प्रारंभ में संगोष्ठी एवं अवगत अवार्ड की संकल्पना डॉ. मोहन बैरागी ने प्रस्तुत की।
मुख्य अतिथि इग्नू के कुलपति प्रो नागेश्वर राव ने कहा कि इक्कीसवीं सदी में शिक्षा के विस्तार के लिए स्वयं आधारित शिक्षा को महत्व देना होगा। इसके लिए भारत सरकार द्वारा स्वयं पोर्टल की संकल्पना की गई है। इस पोर्टल पर दो करोड़ से अधिक लोगों ने पंजीयन करवाया है। वर्तमान में जी ई आर 26 प्रतिशत है, जिसे बढ़ाकर वर्ष 2035 तक 50 प्रतिशत किया जाना है। जी ई आर बढ़ाने के लिए प्रभावपूर्ण व्यवस्था की जा रही है। तकनीक का प्रयोग करते हुए जीईआर बढ़ाया जाएगा। जीईआर में वृद्धि के लिए तीन गुना विश्वविद्यालय प्रारंभ करने होंगे। भारत सरकार द्वारा डिजिटल यूनिवर्सिटी बनाए जाने की संकल्पना की गई है। अक्षर वार्ता पत्रिका हिंदी माध्यम से स्तरीय शोध प्रकाशन में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
अध्यक्ष कुलपति प्रो सी जे विजय कुमार मेनन ने कहा कि समाज में शिक्षा को लेकर एकात्म दृष्टि होना चाहिए, किंतु पूर्व दशकों में शिक्षा को लेकर संपूर्ण दृष्टि समाप्त हो गई थी। कोविड-19 संकट के कारण समाज में बहुत बड़ा परिवर्तन हुआ है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति हमारे समाज और शिक्षा प्रणाली के लिए रामबाण की तरह है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का लक्ष्य समग्र मानव का निर्माण करना है। शोध कार्य को समाज की दृष्टि से उपयोगी होना चाहिए।
कुलानुशासक प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा ने कहा कि इक्कीसवीं सदी डिजिटल क्रांति की सदी है। इसने जहां मानव जीवन को अनेक सुविधाएं प्रदान की हैं, वहीं कई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। सामाजिक व्यवहार और मानसिकता को आकार देने की दृष्टि से डिजिटल तकनीक का प्रभाव हमारे जीवन में लगभग हर जगह दिखाई दे रहा है। साहित्य की दृष्टि से इस दौर में सहज मानवीय संवेदनाओं के समक्ष चुनौतियां मौजूद हैं। इक्कीसवीं सदी को जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संकट की सदी के रूप में देखा जा रहा है। इस दौरान मनुष्य ने कोरोना विभीषिका से जूझते हुए उस पर अपनी अदम्य जिजीविषा के साथ विजय भी प्राप्त की है।
उद्घाटन अवसर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर केंद्रित पुस्तक का लोकार्पण अतिथिगण ने किया। पुस्तक का सम्पादन प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा एवं डॉ मोहन बैरागी ने किया है। कार्यक्रम में इग्नू के कुलपति एवं केंद्रीय हिंदी निदेशालय, नई दिल्ली के निदेशक प्रो नागेश्वर राव को अतिथियों ने शॉल, मौक्तिक माल, स्मृति चिह्न और साहित्य अर्पित कर उनके विशिष्ट अकादमिक योगदान के लिए सारस्वत सम्मान से अलंकृत किया।
शोध पत्र वाचन सत्र की अध्यक्षता विक्रम विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ प्रशांत पुराणिक, डॉ जगदीश चंद्र शर्मा डीएसडब्ल्यू डॉ सत्येंद्र किशोर मिश्रा एवं डॉ तुलसीदास परोहा ने की। कुलसचिव डॉ प्रशांत पुराणिक ने अपने व्याख्यान में कहा कि युद्ध, संक्रामक बीमारी, अस्तित्व को बचाना और कुछ देशों की उपनिवेशवादी नीति इक्कीसवीं सदी की प्रमुख चुनौतियां हैं। साहित्य, संस्कृति, शिक्षा और भाषा के माध्यम से हम इन चुनौतियों का सामना कर सकते हैं। डॉ जगदीश चंद्र शर्मा, डॉ सत्येंद्र किशोर मिश्रा, डॉ तुलसीदास परोहा, डॉ डी डी बेदिया ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
अक्षरवार्ता शोधपत्रिका तथा संस्था कृष्ण बसंती द्वारा उच्च शिक्षा तथा शोध पर प्रतिवर्ष राष्ट्रीय स्तर पर अवगत अवार्ड दिए जाते हैं। इसी शृंखला में इस वर्ष देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों के प्राध्यापकों एवं शोधार्थियों को यह अवार्ड दिए गए। चार सत्रों में आयोजित इस समारोह के पहले सत्र में व्याख्यान, दूसरे सत्र में अवगत अवार्ड 2022 प्रदान किए गए एवं तीसरे सत्र में शोध पत्रों का वाचन एवं चौथे सत्र में काव्य पाठ हुआ। इस आयोजन में लगभग दस राज्यों के प्रतिभागी भाग लेने के लिए आए थे।
काव्य पाठ सत्र में वरिष्ठ कवि श्री अशोक भाटी, निशा पंडित, डॉ मोहन बैरागी और डॉ भेरूलाल मालवीय, शाजापुर ने अपनी कविताओं से उपस्थित जनों को मंत्रमुग्ध किया।
उद्घाटन सत्र में महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय का परिचय एवं स्वागत भाषण संस्कृत एवं दर्शन विभागाध्यक्ष डॉ तुलसीदास परोहा ने दिया। कृष्ण बसंती संस्था एवं अवगत अवार्ड की पृष्ठभूमि पर डॉ मोहन बैरागी ने प्रकाश डाला। अतिथियों का स्वागत डॉ मोहन बैरागी, डॉ ओ पी वैष्णव, डॉ तुलसीदास परोहा, डॉ शुभम शर्मा, डॉ उपेंद्र भार्गव, डॉ रुपाली सारये, डॉ श्वेता पंड्या, डॉ बी एल मालवीय, डॉ अजय शर्मा, डॉ सर्वेश्वर शर्मा, श्री दीपक तँवर, डॉ सुदामा सखवार, डॉ प्रियंका नाग मोढ़, आराध्य बैरागी आदि ने किया।
तकनीकी सत्र में डॉ अमित कुमार गुप्ता, बड़ौदा, श्रीमती हीना तिवारी, सुमेधा दुबे, झालावाड़, दर्जी चंद्रिका, मोडासा, गुजरात, हेमंत पंड्या, पूजा कुमारी गुप्ता, हंसराज मीणा आदि ने शोध पत्र वाचन किया।
उद्घाटन समारोह का संचालन डॉ जगदीश चंद्र शर्मा ने किया एवं आभार प्रदर्शन डॉ डी डी बेदिया ने किया। शोध सत्र का संचालन डॉ विजय कुमार शर्मा ने एवं आभार प्रदर्शन डॉ उपेंद्र भार्गव ने किया। काव्य पाठ सत्र का संचालन डॉ मोहन बैरागी ने किया और आभार डॉ ओ पी वैष्णव ने माना।
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